कर्मचारियों को नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर ! यूपी के लाखों कर्मचारियों को मिला मेडिकल रीइंबर्समेंट का नया तोहफा
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लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए उन्हें अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इलाज पूरा होने के 30 दिन के भीतर कर्मचारी सूचना देंगे और 90 दिन के भीतर दावा करना होगा। जिसके बाद 45 दिन के भीतर भुगतान राशि तय कर दी जायेगी। इतना ही नहीं इसके लिए कर्मचारियों को चक्कर भी नहीं काटना पड़ेगा, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
दरअसल, यूपी में 8 लाख के करीब सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। शासन ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति (मेडिकल रीइंबर्समेंट) के निपटारे की जटिल प्रक्रिया को आसान बना दिया है, इसके लिए अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने एक शासनादेश भी जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि मेडिकल क्लेम के लिए किसी भी कर्मचारी को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, साथ ही कोई कागजी पत्राचार भी नहीं करना होगा। इसके लिए शासन ने पारदर्शी व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत जनहित स्वास्थ्य पोर्टल को मानव संपदा पोर्टल के साथ जोड़ दिया है। पोर्टल पर जाकर कर्मचारी सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दावों के निपटारे में समय कम लगेगा।
कागजी कार्रवाई में लगता था समय, 15 दिन में विभाग करेगा फॉरवर्ड
अस्पतालों के बिलों का मिलान पहले लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई और दिल्ली स्थित एम्स की दरों पर मैनुअली किया जाता था, जिसमें काफी समय लगता था, लेकिन पोर्टल के जरिए यही काम अब ऑनलाइन और स्वचालित तरीके से होगा। जिससे वक्त बचेगा। इसके अलावा समय की बचत के लिए सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक समय सीमा भी निर्धारित कर दी है। आवेदन करने के बाद विभाग के जिलास्तरीय नोडल अधिकारी को 15 दिनों के भीतर फॉरवर्डिंग लेटर अपलोड करना होगा। शासन की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि यदि दावे में कोई समस्या या त्रुटि नहीं है, तो आवेदन जमा होने से लेकर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से धनराशि स्वीकृत करने तक की कुल समय सीमा 45 कार्यदिवस निर्धारित की गई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि अब किसी भी कर्मचारी का ऑफलाइन जमा किया गया क्लेम स्वीकार नहीं किया जाएगा।
30 दिन के भीतर देनी होगी सूचना
इलाज शुरू होने के 30 दिन के अंदर कर्मचारी को अपने विभाग को बीमारी की सूचना देनी होगी। वहीं इलाज पूरा होने के 90 दिन के भीतर मेडिकल रीइंबर्समेंट का दावा भी करना होगा। कर्मचारी को यह दावा जनहित स्वास्थ्य पोर्टल पर दाखिल करना होगा। कर्मचारी सिटीजन लॉगिन बनाकर डैशबोर्ड में ‘पेमेंट ऑफ मेडिकल रिम्बर्समेंट’ विकल्प के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा।
KGMU नर्सेज एसोसिएशन की मांग : चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों से 30 प्रतिशत की कटौती बंद करे प्रशासन
केजीएमयू नर्सेज एसोसिएशन के उप नर्सिंग अधीक्षक एवं संरक्षक प्रदीप गंगवार ने बताया है कि उत्तर प्रदेश शासन की तरफ से जारी इस शासनादेश में सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावों के निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की व्यवस्था की गई है। वह स्वागत योग्य है, लेकिन केजीएमयू के कर्मचारियों और अधिकारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ 23 अगस्त 2016 से ही मिल रहा है। परंतु केजीएमयू में उक्त लाभ कुल बिल से 30 प्रतिशत की कटौती के उपरांत ही संबंधित कार्मिक को भुगतान किया जाता है। उपर्युक्त शासनादेश में चिकित्सा प्रतिपूर्ति की देय राशि का निर्धारण संबंधित चिकित्सा व्यय और शासन द्वारा निर्धारित मान्य दरों के आधार पर किए जाने की व्यवस्था है। इसमें कुल चिकित्सा बिल पर 30 प्रतिशत की अनिवार्य कटौती का कोई प्रावधान नहीं है।
इसी शासनादेश की भावना और व्यवस्था के अनुरूप किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में भी कार्यरत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा अधिकारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों का निस्तारण किया जाना चाहिए। अतः केवल 30 प्रतिशत की एक समान कटौती करके भुगतान करने के स्थान पर शासनादेश में निर्धारित प्रक्रिया एवं मान्य दरों के आधार पर वास्तविक देय प्रतिपूर्ति का निर्धारण किया जाना अधिक उचित होगा। हमें पूर्ण विश्वास है कि अब KGMU प्रशासन का प्रयास रहेगा कि कर्मचारियों एवं अधिकारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा शासनादेश के अनुरूप पारदर्शी, समयबद्ध और न्यायसंगत तरीके से उपलब्ध हो तथा पात्र देय राशि का भुगतान 30 प्रतिशत की किसी सामान्य कटौती के बिना नियमानुसार सुनिश्चित किया जाएगा।
अतुल मिश्र का बड़ा बयान: 'कागजी' साबित हो रहा दीनदयाल कार्ड, शहर का कोई निजी अस्पताल नहीं दे रहा इलाज
इप्सेफ के उपमहासचिव अतुल मिश्र ने कहा कि शासनादेश आते रहते हैं, लेकिन इसका लाभ कर्मचारियों को कितना मिलेगा। यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। यूपी के कर्मचारियों के लिए सरकार ने दीनदयाल कार्ड जारी किया है, जिसको लाभ कर्मचारियों को कितना मिलता है, यह तो खुद कर्मचारी ही बता सकता है, उन्होंने बताया कि उस कार्ड को प्रदेश तो छोड़िये शहर का कोई निजी अस्पताल नहीं मानता है, उससे आप इलाज नहीं करा सकते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन उसका लाभ कर्मचारियों को न मिलना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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