#Draft: बिलासपुर में 'No Plastic Zone' अभियान शुरू, 10 प्रमुख बाजार शामिल।

निगम की टीम करेगी औचक निरिक्षण, सिंगल युज प्लास्टिक का उपयोग करने पर लगेगा भारी जुर्माना

#Draft: बिलासपुर में 'No Plastic Zone' अभियान शुरू, 10 प्रमुख बाजार शामिल।

बिलासपुर नगर निगम ने शहर को स्वच्छ और प्रदुषण मुक्त बनाने के लिये एक बडा कदम उठाया है। शहर के 10 सबसे व्यस्त और प्रमुख बाजारों को पूरी तरह  'No Plastic Zone' घोषित कर दिया गया है। 

बिलासपुर । बिलासपुर को कचरा मुक्त और सुंदर बनाने के उदेश्य से नगर निगम प्रशासन ने शहर के प्रमुख बाजारों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इस नए नियम के तहत गोलबाजार, सदर बाजार और नेहरू चौक सहित 10 इलाकों को 'No Plastic Zone' बनाया गया है। 

image

The Frequent Landslides in the Himalayas and the Humanitarian Challenges Related Post The Frequent Landslides in the Himalayas and the Humanitarian Challenges

बिलासपुर नगर निगम का प्लास्टिक विरोधी अभियान
  • कार्रवाई और जब्ती: निगम की स्वच्छता टीम ने व्यापार विहार, पुराना बस स्टैंड और अन्य प्रमुख बाजारों में औचक निरीक्षण कर प्रतिबंधित सिंगल-यूज (एकल उपयोग) प्लास्टिक व पॉलीथिन जब्त किए हैं।
  • जुर्माना: नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों और व्यापारियों पर नगर निगम द्वारा निरंतर आर्थिक जुर्माना लगाया जा रहा है ताकि लोग दोबारा इनका इस्तेमाल न करें।
  • जन-जागरूकता: निगम अधिकारियों व जोन कमिश्नरों के नेतृत्व में दुकानदारों को समझाइश दी जा रही है कि वे प्लास्टिक की थैलियों के बजाय कपड़े या जूट से बने पर्यावरण-अनुकूल थैलों का उपयोग करें।
  • प्रशासन की चेतावनी: निगम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग जारी रखने पर भविष्य में और अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई व भारी जुर्माना वसूला जाएगा।

 

HOMETHON 2025 to Boost Housing Sales due to Increased Channel Partners Participation Related Post HOMETHON 2025 to Boost Housing Sales due to Increased Channel Partners Participation

Post count

View0
Tags:

About The Author

Administrator Picture

Lorem Ipsum is 2 simply dummy text of the printing and typesetting industry. Lorem Ipsum has been the industry's standard dummy text ever since the 1500s, when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries, but also the leap into electronic typesetting, remaining essentially unchanged. It was popularised in the 1960s with the release of Letraset sheets containing Lorem Ipsum passages, and more recently with desktop publishing software like Aldus PageMaker including versions of Lorem Ipsum.

Related Posts

Post Comment

Comment List

Advertisement

Latest News